संविधान के सामने खड़ा भारत

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‘संविधान के सामने खड़ा भारत’ वरिष्ठ साहित्यकार तेजपाल सिंह ‘तेज’ द्वारा लिखित एक विचारोत्तेजक पुस्तक है। यह पुस्तक वर्तमान भारत में संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, बहुलतावाद और डॉ. आंबेडकर की वैचारिक विरासत से जुड़े अहम सवालों का आलोचनात्मक विश्लेषण करती है।

इसमें हिंदुत्व की विचारधारा, वर्ण-व्यवस्था, अल्पसंख्यक अधिकार, शिक्षा और संस्थागत स्वायत्तता जैसे समकालीन मुद्दों पर गहराई से चर्चा की गई है।

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Description

<h3>पुस्तक परिचय:</h3>
<p><strong>’संविधान के सामने खड़ा भारत'</strong> में संकलित लेखों का केंद्रीय स्वर संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, बहुलतावाद और डॉ. आंबेडकर की वैचारिक विरासत के इर्द-गिर्द निर्मित है।</p>

<p>साथ ही, इन लेखों में ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा, आरएसएस/हिंदुत्व की विचारधारा, वर्ण-व्यवस्था, अल्पसंख्यक अधिकार, शिक्षा और संस्थागत स्वायत्तता जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर आलोचनात्मक विमर्श प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक वक्ताओं के वक्तव्यों, साक्षात्कारों और उपलब्ध रिपोर्टों के तर्कों का एक क्रमबद्ध एवं संपादित रूप है, जो भारत के वर्तमान सामाजिक व संवैधानिक परिदृश्य को गहराई से समझने के लिए एक अनिवार्य पाठ्य सामग्री है।</p>

<h3>लेखक परिचय:</h3>
<p><strong>तेजपाल सिंह ‘तेज'</strong> (जन्म 1949) की विविध विधाओं की तीन दर्जनों से भी ज़्यादा किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। आपको हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार (1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से सम्मानित किया जा चुका है।</p>

<h3>मुख्य विशेषताएं (Key Features):</h3>
<ul>
<li><strong>विषय:</strong> संविधान, लोकतंत्र, बहुलतावाद और सामाजिक न्याय।</li>
<li><strong>गहन विश्लेषण:</strong> अल्पसंख्यक अधिकार, शिक्षा और संस्थागत स्वायत्तता पर विमर्श।</li>
<li><strong>लेखक:</strong> तेजपाल सिंह ‘तेज’ (साहित्यकार सम्मान से अलंकृत)।</li>
<li><strong>मूल्य:</strong> ₹399</li>
</ul>

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