अश्क क्यूँ छलकते हैं (ग़ज़ल संग्रह)

₹200.00 100

Ordered:0
Items available:5

लेखक: शिव नारायण शिव

प्रकाशक: शब्दधारा पब्लिकेशन (Shabd Dhara Publication)

पुस्तक के बारे में:

“अश्क क्यूँ छलकते हैं” प्रसिद्ध शायर और कवि शिव नारायण शिव द्वारा रचित एक भावुक और दिल को छू लेने वाला ग़ज़ल संग्रह है।

“कभी आँसू भी शब्द बन जाते हैं, और दिल के ज़ख़्म कह जाते हैं…”

यह ग़ज़ल संग्रह इंसान के भीतर छिपे दर्द, तन्हाई, प्रेम और ज़िंदगी के कड़वे-मीठे अनुभवों को बेहद खूबसूरती से बयां करता है। इसमें शामिल ग़ज़लें पाठक को अपने ही दिल के जज्बातों और एहसासों से रूबरू कराती हैं।

किताब की मुख्य विशेषताएं:

  • मर्मस्पर्शी ग़ज़लें: दर्द, मोहब्बत, तन्हाई और ज़िंदगी के रंगों से सजी हुई ग़ज़लें।

  • गहरी भावनाएं: यह संग्रह उन पाठकों के लिए बेहतरीन है जो शायरी और ग़ज़लों के ज़रिए अपने छिपे हुए जज़्बातों को महसूस करना चाहते हैं।

  • अनुभवी रचनाकार: शिव नारायण शिव की यह कृति उनके समृद्ध साहित्यिक सफर का एक बेहतरीन नमूना है।

लेखक परिचय:

शिव नारायण शिव उत्तर प्रदेश के सोनभद्र (राबर्ट्सगंज) के निवासी हैं। वे हिंदी साहित्य जगत में एक सक्रिय और जाने-माने कवि व रचनाकार हैं। उनकी कई चर्चित कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें:

  • ग़ज़ल संग्रह: ‘गाँव से बाजार तक’, ‘एक तनहा जिंदगी’, ‘बेखबर बागबां’, ‘फूल क्यूँ मुस्कराये नहीं’, ‘सूखे होंठ तड़पती सांसे में’, ‘तुम्हारे आने से’

  • गीत व काव्य संग्रह: ‘किससे बात करूँ’, ‘कश्तियाँ प्यार की’, और ‘याद तेरी आई’ शामिल हैं।

5 in stock

4 People watching this product now!
SKU: SBD0005 Category:
Additional information
Weight200 g
Dimensions5.5 × 2.2 × 8.5 in
0 reviews
0
0
0
0
0

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.